माधवराव देशपांडे ('शामा')
हेमाडपंत उन्हें 'बाबा का बालक' कहते हैं। बाबा जो पत्र लिखवाते, वही लिखते। जामनेर के चमत्कार से बापाजी की पत्नी के प्लेग-निवारण तक — बाबा के दूर-कार्यों के साधन। 14 वर्ष बाबा के साथ मस्जिद में सोये।
मूल तथ्य
| जन्म | नीमगाँव कोशिम्बे, अहमदनगर जिला |
|---|---|
| व्यवसाय | ग्राम-शिक्षक (निःशुल्क सेवा) |
| बाबा से सम्बन्ध | अन्तरंग मध्यस्थ; 14 वर्ष शय्या-साथी |
| प्रसिद्ध रात्रि-त्रिकूट | बाबा (पूर्व), शामा (पश्चिम), म्हाळसापति (उत्तर) — पैर मध्य में मिले हुए (अध्याय 8) |
जीवन-प्रसंग
बाबा के मध्यस्थ
जब हेमाडपंत स्वयं बाबा से सच्चरित्र-रचना की अनुमति नहीं माँग सके, उन्होंने शामा से मध्यस्थता करवायी (अध्याय 2)। बाबा का उत्तर — 'वह कथाओं का संग्रह करे… जब उसका अहंकार पूर्णतः नष्ट हो जायेगा, मैं स्वयं उसमें प्रविष्ट होकर अपना जीवन-चरित लिखूँगा' — शामा के माध्यम से ही दिया गया।
जामनेर का चमत्कार (1904-05)
जब नानासाहेब चांदोरकर की पुत्री मैनाताई प्रसव-कष्ट में थीं, बाबा ने शामा को रामगिरबुवा के लिए माधव अडकर रचित आरती तत्क्षण लिखकर देने का आदेश दिया। रामगिरबुवा ने उदी और आरती जामनेर पहुँचायी; मैनाताई का सुरक्षित प्रसव हुआ (अध्याय 33)।
बापाजी की पत्नी का प्लेग
शामा के भाई बापाजी की पत्नी पर बुबॉनिक प्लेग का आक्रमण हुआ। बाबा ने शामा को रोका: 'अभी मत जाओ, उदी भेज दो।' उदी से एक रात में रोगिणी स्वस्थ हो गयी (अध्याय 34)।
शामा की माता के व्रत
शामा की दिवंगत माता ने वणी की सप्त-शृंगी देवी से दो व्रत किए थे — दोनों अधूरे रह गये। तीस वर्ष बाद बाबा ने शामा को स्वयं वणी जाकर पूर्ण करने को कहा (अध्याय 30)।
शामा को विष्णु-सहस्र-नाम
बाबा ने रामदासी को सोनामुखी लाने भेजा, उसकी अनुपस्थिति में रामदासी की प्रति शामा को सौंप दी — 'यह ग्रन्थ अत्यन्त मूल्यवान है; मैंने इसे एक बार अपने हृदय से लगा लिया था…' (अध्याय 27)।
'72 पीढ़ियाँ'
एक बार बाबा ने शामा के गाल पर चिकोटी काटी। शामा ने नाराज़ी का दिखावा किया। बाबा बोले — 'अरे शामा, उन 72 पीढ़ियों में जब तुम मेरे साथ थे, मैंने तुम्हें कभी चिकोटी नहीं काटी' (अध्याय 36)।