स्रोत और ग्रन्थ-सूची
यह स्थल एक ही ग्रन्थ पर नहीं — एक बहु-स्तरीय स्रोत-वृक्ष पर बना है। यहाँ का प्रत्येक कथन निम्नलिखित प्राथमिक, द्वितीयक, अथवा अकादमिक स्रोतों में से एक अथवा अधिक तक खोजा जा सकता है।
स्तर 1 — प्राथमिक प्रामाणिक ग्रन्थ
श्री साईं सच्चरित्र — मूल मराठी (1929)
साईं बाबा की प्रामाणिक जीवनी, 1923-1929 में हेमाडपंत द्वारा स्वयं बाबा की अनुमति से रचित (अध्याय 2)। सब अंग्रेज़ी संस्करण इसी से वंशजात हैं।
श्री साईं सच्चरित्र — अंग्रेज़ी अनुवाद (1944)
गुणाजी का अंग्रेज़ी रूपान्तर ही वह संस्करण है जिसे यह स्थल उद्धृत करता है जब मराठी-विशिष्ट कोई प्रश्न नहीं होता।
Devotees' Experiences of Sri Sai Baba (1940 का दशक)
उन भक्तों के अस्सी प्रत्यक्षदर्शी-बयान जिनका स्वयं साईं बाबा से सम्पर्क था। 1936 के दौरान नरसिंह स्वामी और उनके सचिवों के सम्मुख हस्ताक्षरित। सच्चरित्र के बाहर सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण स्रोत।
खापर्डे डायरी (1910-1912)
शिरडी-निवास के समय खापर्डे द्वारा रखी गयी दिन-प्रति-दिन की निजी डायरी। सर्वाधिक समकालीन प्राथमिक स्रोत — स्मृति-कथन नहीं, अपितु लगभग-तत्काल प्रत्यक्ष-दर्शन।
स्तर 2 — द्वितीयक प्रामाणिक लेखन
श्री साईं लीला पत्रिका (1923 से)
संस्थान की अधिकृत त्रैमासिक। 5 नवम्बर 1918 का प्रो. जी. जी. नार्के का पत्र (खंड 1, पृष्ठ 78) — महासमाधि के सटीक समय का स्रोत; और बी. वी. देव का जामनेर के चमत्कार पर लेख (खंड 13, अंक 11-13) — सब यहाँ संरक्षित।
भक्त लीलामृत और संत कथामृत
दास गणु के साईं-कीर्तन (भक्त लीलामृत के अध्याय 31-33; संत कथामृत का अध्याय 57) — सच्चरित्र से कई वर्ष पूर्व प्रकाशित प्रथम साईं-कथाएँ।
स्तर 3 — अकादमिक अध्ययन (पश्चिमी छात्रवृत्ति)
The Life and Teachings of Sai Baba of Shirdi (1993)
साईं बाबा का प्रथम पूर्ण-पुस्तकीय अकादमिक अध्ययन, रिगोपोलोस की पीएच.डी. शोध-प्रबन्ध से विकसित। केम्ब्रिज-प्रकाशित बुलेटिन ऑफ़ SOAS की 1995 की समीक्षा इसे "मानक अकादमिक जीवनी" कहती है। इसमें कालक्रमिक पुनर्निर्माण, सूफ़ी और भक्ति परम्पराओं के साथ तुलना-विश्लेषण, और 1993 से पूर्व के साईं-साहित्य की विस्तृत ग्रन्थ-सूची है।
Unravelling the Enigma: Shirdi Sai Baba in the Light of Sufism (1999)
द्वितीय प्रमुख अकादमिक जीवनी, साईं बाबा के सूफ़ी सम्बन्धों और मस्जिद (द्वारकामाई) के सन्दर्भ पर केन्द्रित। बाबा के मुसलमान भक्तों का वॉरेन का सावधान प्रलेखन रिगोपोलोस के व्यापक उपचार को पूरक है।
Miracle Cures for a Suffering Nation: Sai Baba of Shirdi
पीयर-समीक्षित अकादमिक लेख जो बाबा की रोग-निवारण-कथाओं को परवर्ती-औपनिवेशिक राष्ट्रवाद के सन्दर्भ में रखता है।
स्तर 4 — संग्रहागार और संस्थागत
श्री साईं बाबा संस्थान न्यास, शिरडी
संस्थान के पास हेमाडपंत की मूल मराठी पाण्डुलिपि, खापर्डे डायरी की मूल प्रति, और साईं लीला पत्रिका के क्रमिक संग्रह — सब हैं। साईं बाबा पर अधिकृत संस्था, और प्राथमिक दस्तावेज़ों की एकमात्र संरक्षक।
हमारा सम्पादकीय मानक
- साईं बाबा के वचन सर्वप्रथम गुणाजी के अंग्रेज़ी रूप में उद्धृत हैं। हिन्दी पृष्ठों पर कोष्ठक में हिन्दी अर्थ जोड़ा जाता है — अंग्रेज़ी स्रोत को कभी प्रतिस्थापित नहीं किया जाता।
- तिथि-दावे स्रोत-सहित हैं — किसी साईं लीला लेख, खापर्डे डायरी, अथवा नरसिंह स्वामी बयान से, बिना-स्रोत नहीं।
- जहाँ हम पुनर्व्याख्या करते हैं, स्पष्ट कहते हैं — "विश्लेषणात्मक प्रस्तावना" अंश सम्पादक की रूपरेखा है, हेमाडपंत का उद्धरण नहीं।
- जहाँ स्रोत मौन है, हम मौन रहते हैं — कल्पना से अच्छा एक ईमानदार रिक्ति।