आठ अन्तरंग भक्त
वे आठ शिरडी-वासी जिनके साथ बाबा का सम्बन्ध सच्चरित्र में सर्वाधिक विस्तार से दर्ज है — उनकी जीवन-तिथियाँ, बाबा से उनका सम्बन्ध, और उनकी निजी कथाएँ।
अन्तरंग भक्त
हेमाडपंत (गोविन्द रघुनाथ डाभोलकर, 1859-1929)
सच्चरित्र के रचयिता; पूर्व रेज़िडेण्ट मजिस्ट्रेट, बान्द्रा।
अन्तरंग भक्त
शामा (माधवराव देशपांडे)
बाबा के निकटतम मध्यस्थ-शिष्य; ग्राम-शिक्षक।
अन्तरंग भक्त
भगत म्हाळसापति
खण्डोबा-मन्दिर के पुजारी; पहले व्यक्ति जिन्होंने बाबा को 'या साईं' से सम्बोधित किया।
अन्तरंग भक्त
तात्या कोते पाटिल
बाबा के 14-वर्ष शय्या-साथी; जिनकी मृत्यु बाबा ने अपने ऊपर ली।
अन्तरंग भक्त
मेघा (1912 में दिवंगत)
साठे का अनपढ़ रसोइया जो बाबा को शिव-रूप मानकर 12 वर्ष पूजा करता रहा।
अन्तरंग भक्त
दास गणु महाराज
कीर्तनकार जिन्होंने बम्बई-प्रेजिडेन्सी में बाबा की महिमा फैलायी।
अन्तरंग भक्त
नानासाहेब चांदोरकर
जामनेर के मामलतदार; जामनेर के चमत्कार के केन्द्रीय भक्त।
अन्तरंग भक्त
काकासाहेब दीक्षित (हरि सीताराम, 1864-1926)
बम्बई सॉलिसिटर; दीक्षित वाडे के निर्माता।