सिट विद् साईं — साईं के सान्निध्य में
श्री साईं बाबा शिरडी की प्रलेखित जीवनी और शिक्षाओं का एक स्रोत-सम्मत संदर्भ-स्थल। हेमाडपंत के *सच्चरित्र* (1929) से सीधे, अनुवादक न. वि. गुणाजी (1944) के माध्यम से — कोई अनुमान, कोई जोड़ा हुआ कथन नहीं।
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श्री साईं सच्चरित्र — 47 अध्याय
हेमाडपंत द्वारा रचित जीवनी का सम्पूर्ण हिन्दी रूपान्तरण — अध्याय-दर-अध्याय, बाबा-वचनों के मूल पाठ सहित।
आठ अन्तरंग भक्तों के जीवन
शामा, हेमाडपंत, म्हाळसापति, तात्या पाटिल, मेघा, दास गणु, नानासाहेब चांदोरकर, काकासाहेब दीक्षित।
भक्तों के 80 अनुभव
बी. वी. नरसिंह स्वामी द्वारा 1936 में दर्ज प्रत्यक्षदर्शी विवरण — हस्ताक्षरित बयानों के साथ।
1838 → 1918 — जीवन-काल
बाबा के जीवन की प्रमुख तिथियाँ और प्रलेखित घटनाएँ — समय-क्रम में।
संस्कृत-मराठी पारिभाषिक शब्द
उदी, धूनी, द्वारकामाई, सबूरी, श्रद्धा, दक्षिणा — अर्थ और प्रसंग।
बाबा की केन्द्रीय शिक्षाएँ
श्रद्धा-सबूरी, अहिंसा, नवविधा भक्ति, हिन्दू-मुसलमान एकता।
सिद्धान्त — प्रामाणिकता
यहाँ हर वाक्य का स्रोत है। बाबा के मुख से निकले हर शब्द को मूल अंग्रेज़ी पाठ में संरक्षित किया गया है, और कोष्ठक में हिन्दी अर्थ दिया गया है — ताकि गहन भक्तिमय पाठ भी अनुवाद से अप्रभावित रहे। कोई कथन यदि किसी एक चश्मदीद-गवाह के बयान पर आधारित है, तो उस गवाह का नाम और बयान-तिथि सच्चरित्र के अनुसार स्पष्ट है।
यह स्थल मूल मराठी सच्चरित्र (1929) और गुणाजी के अंग्रेज़ी अनुवाद (1944) — दोनों के साथ संगत है, और किसी भी विवाद-योग्य प्रसंग पर पूर्ण-स्रोत-सूत्र देता है।