Sit With Sai
अन्तरंग भक्त

हेमाडपंत (गोविन्द रघुनाथ डाभोलकर, 1859-1929)

श्री साईं सच्चरित्र के रचयिता। पूर्व रेज़िडेण्ट मजिस्ट्रेट, बान्द्रा। 1910 में नानासाहेब चांदोरकर के आग्रह पर शिरडी आये। बाबा ने उन्हें 'हेमाडपंत' नाम दिया — 13वीं शताब्दी के यादव-मन्त्री हेमाद्रिपंत के संदर्भ में।

मूल तथ्य

जन्म-नामगोविन्द रघुनाथ डाभोलकर
उपाधिहेमाडपंत — बाबा द्वारा प्रदत्त (अध्याय 2)
व्यवसायरेज़िडेण्ट मजिस्ट्रेट, बान्द्रा (बम्बई)
शिरडी प्रथम-आगमन1910
सेवा-निवृत्ति1916; गुरुपूर्णिमा पर शिरडी आये (अध्याय 3)
देहान्त1929 — सच्चरित्र समापन से ठीक पूर्व

जीवन-प्रसंग

पहली भेंट का विवाद

आगमन के दिन ही हेमाडपंत बालासाहेब भाटे के साथ साठेवाडे में 'स्वतंत्र इच्छा बनाम भाग्य' पर एक घंटे विवाद करते रहे। मस्जिद पहुँचने पर बाबा ने उनसे बिना किसी सूत्र के पूछा — 'वाडे में क्या चर्चा थी? यह हेमाडपंत क्या कह रहा था?' (अध्याय 2)।

नाम का अर्थ

हेमाद्रिपंत 13वीं शताब्दी में देवगिरि के यादव राजाओं के विद्वान मन्त्री और मोडी लिपि के प्रवर्तक थे। डाभोलकर का यह नाम स्वीकार करना एक ओर आत्म-निन्दा (विद्वत्ता की तुलना में) और दूसरी ओर सूक्ष्म प्रशंसा (विवाद में चतुराई) थी।

सच्चरित्र-रचना की अनुमति

हेमाडपंत स्वयं नहीं पूछ सके; शामा ने मध्यस्थता की। बाबा ने सिर पर हाथ रखकर उदी देते हुए कहा: 'वह कथाओं और अनुभवों का संग्रह करे… जब उसका अहंकार पूर्णतः नष्ट हो जायेगा, मैं स्वयं उसमें प्रविष्ट होकर अपना जीवन-चरित लिखूँगा' (अध्याय 2)।

पेन्शन-प्रसंग (1916)

हेमाडपंत की निवृत्ति-पेन्शन अपर्याप्त थी। अन्ना चिंचणीकर ने मध्यस्थता की। बाबा का उत्तर: 'उसे कोई और काम मिल जाएगा, पर अब वह मेरी सेवा करे और प्रसन्न रहे। उसकी थाली सदैव भरी रहेगी' (अध्याय 3)।

छाछ का प्याला

एक भोजन के पश्चात बाबा ने उन पर एक छाछ का प्याला आग्रह से थोपा: 'सब पी लो — ऐसा अवसर आगे नहीं मिलेगा' (अध्याय 38)। यह वचन बाबा की निकट आती महासमाधि की पूर्व-घोषणा सिद्ध हुआ।

काकासाहेब का देहान्त

5 जुलाई 1926 को हेमाडपंत काकासाहेब दीक्षित के साथ एक रेल में थे; काकासाहेब अचानक हेमाडपंत के कन्धे पर गर्दन फेंककर देह त्याग गये — बाबा के पहले के वचन की पूर्ति (अध्याय 50)।

ग्रन्थ-समापन

हेमाडपंत 1929 में उपसंहार-अध्याय की पाण्डुलिपि अधूरी छोड़ गये। बी. वी. देव ने पद्य-सूची रचकर ग्रन्थ को पूर्ण किया।

सम्बन्धित अध्याय

अध्याय 01अध्याय 02अध्याय 03अध्याय 24अध्याय 38अध्याय 43-44अध्याय 50उपसंहार
सम्पादक: सिट विद् साईं सम्पादकीय · सम्पादकीय सिद्धान्त ·