अध्याय 22 — सर्प-दंशों से बचाव; सर्प-हत्या पर बाबा का दृष्टिकोण
स्रोत: श्री साईं सच्चरित्र, अनुवादक: न. वि. गुणाजी
मराठी मूल: सच्चरित (archive.org स्कैन) · भक्त-बयान: नरसिंह स्वामी 1936 (Internet Archive) · पूर्ण ग्रन्थ-सूची: /hi/sources.html
मूल पाठ: https://www.saibaba.org/satcharitra/sai22.html
अनुभाग
बालासाहेब मिरीकर — दृष्टान्त द्वारा चेतावनी
सरदार काकासाहेब मिरीकर के पुत्र बालासाहेब मिरीकर कोपरगाँव के मामलतदार थे। चितली के दौरे पर जाते समय वे दर्शनार्थ शिरडी आये। बिना किसी संदर्भ के बाबा उनकी ओर मुड़े और बोले:
"Do you know our Dwarakamayi? This Masjidmayi is very merciful — she is the mother of the simple devotees, whom she will save in calamities. Once a person sits on her lap, all his troubles are over."
(हिन्दी अर्थ: "क्या तुम हमारी द्वारकामाई को जानते हो? यह मस्जिदमाई अत्यन्त दयालु है — वह सरल भक्तों की माता है, संकटों में उनकी रक्षा करती है। जब कोई एक बार उसकी गोद में बैठ जाता है, उसके सब कष्ट समाप्त हो जाते हैं।")
मिरीकर को उदी देने के पश्चात बाबा ने अपनी बायीं भुजा को मुट्ठी में बन्द कर दायीं कोहनी के निकट लाते हुए जोड़ा:
"Do you know the 'Lamba Bawa' (long gentleman) — viz. serpent? He is so terrible. But what can he do to the children of Dwarakamayi?"
(हिन्दी अर्थ: "क्या तुम 'लम्बा बावा' (लम्बे सज्जन) — अर्थात् सर्प — को जानते हो? वह कितना भयावह है। परन्तु वह द्वारकामाई के बच्चों का क्या कर सकता है?")
बाबा ने तब शामा को मिरीकर के साथ जाने को कहा। मिरीकर ने पहले इनकार किया; बाबा बोले: "ठीक है, मत जाओ। हमें भली बात सोचनी और भला कर्म करना चाहिए। जो होना है वह तो होगा ही।" मिरीकर ने पुनर्विचार किया, शामा को वापस बुलवाया, और दोनों साथ गये।
रात्रि नौ बजे चितली में वे कार्यालय-कर्मचारियों की प्रतीक्षा में मारुति-मन्दिर में डेरा डालकर बैठ गये। मिरीकर एक चटाई पर बैठे समाचार-पत्र पढ़ रहे थे, ऊपरी धोती कमर पर बिछी हुई थी। एक सर्प उसी फैले हुए वस्त्र पर बैठा था — अनदेखा। चपरासी एक लालटेन लेकर आया, देखा, और शोर मचाया। सर्प कमर से नीचे उतरा, मिरीकर से दूर सरका, और मार डाला गया।
बापूसाहेब बूटी — मृत्यु की भविष्यवाणी
ज्योतिषी नानासाहेब देंगले ने एक दिन बूटी से कहा कि यह दिन उनके लिए अशुभ है — उनके प्राणों पर संकट है। बूटी अशान्त हो गये। मस्जिद में बाबा बोले:
"What does this Nana say? He foretells death for you. Well, you need not be afraid. Tell him boldly, 'Let us see how death kills.'"
(हिन्दी अर्थ: "यह नाना क्या कह रहा है? तुम्हारी मृत्यु की भविष्यवाणी कर रहा है। ठीक है, तुम्हें डरने की आवश्यकता नहीं। उससे साहस से कहो — 'देखें, मृत्यु कैसे मारती है।'")
उसी सायं बूटी अपने शौचालय गये और वहाँ एक सर्प देखा। उनके सेवक ने उसे मारने की तैयारी की; इससे पहले कि वह छड़ी लेकर लौटे, सर्प अदृश्य हो गया।
कोराले के अमीर शक्कर — चावड़ी में नियुक्त
अमीर शक्कर बान्द्रा के कसाई-जाति के एक कमीशन-एजेन्ट थे। गठिया-रोग से पीड़ित होकर वे शिरडी आये और निवृत्ति की प्रार्थना की। बाबा ने उन्हें मस्जिद में नहीं रहने दिया, चावड़ी में नियुक्त किया — उस समय एक नम और अस्वास्थ्यकर स्थान। तथापि अमीर को बाबा का निरन्तर संग प्राप्त हुआ, जो प्रति प्रातः-सायं वहाँ से निकलते थे और एकान्तर रातों में चावड़ी में सोते थे। नौ मास बाद वे निराश हो उठे, बिना अनुमति के कोपरगाँव चले गये, धर्मशाला में एक मरते हुए फ़कीर से मिले जिसने जल माँगा — और उनकी मृत्यु के एकमात्र साक्षी बने। उत्तरदायी ठहराये जाने के भय से अमीर रात भर बाबा का नाम जपते शिरडी लौटे, और स्वस्थ होने तक पुनः चावड़ी में रहे।
एक मध्य-रात्रि बाबा चिल्लाकर बोले:
"Oh Abdul, some devilish creature is dashing against the side of My bed."
(हिन्दी अर्थ: "अरे अब्दुल, कोई दुष्ट प्राणी मेरी शय्या के किनारे टकरा रहा है।")
अब्दुल ने बाबा की शय्या की जाँच की और कुछ न पाया। बाबा ने सट्के से भूमि पर प्रहार किया और कहा कि लालटेन अमीर के तकिये के पास ले जाओ। वहाँ एक सर्प की कुण्डली देखी गयी, सिर ऊपर-नीचे हिलाता हुआ। उसे मार डाला गया।
हेमाडपंत — बिच्छू और सर्प
दो प्रसंग:
(1) रामायण-पाठ के समय बिच्छू। काकासाहेब दीक्षित की अनुशंसा पर एकनाथ की भागवत और भावार्थ-रामायण प्रति दिन ऊँचे स्वर में पढ़ी जाती थी। राम-महिमा के परीक्षण-वर्णन के समय हेमाडपंत को अपने दायें कन्धे पर कुछ अनुभूत हुआ। उन्होंने दृष्टि डाली: एक बड़ा बिच्छू उनकी ऊपरी धोती पर बैठा था, अचल। श्रोताओं को बिना चौंकाये उन्होंने धोती के दो छोर समेटे, बिच्छू को भीतर बन्द कर लिया, बाहर निकले, और बाग़ में छोड़ दिया।
(2) ऊपरी मंज़िल का सर्प। सूर्यास्त के ठीक पूर्व, काकासाहेब के वाडे की ऊपरी मंज़िल पर बैठे हुए — एक सर्प खिड़की की चौखट के एक छेद से अन्दर आया और कुण्डली मारकर बैठ गया। लालटेन लायी गयी, छड़ियाँ मँगवायी गयीं — परन्तु किसी प्रहार से पहले ही सर्प उसी छेद से बाहर निकल गया।
सर्प-हत्या पर बाबा का निश्चायक मत
दूसरी घटना के पश्चात मुक्ताराम ने टिप्पणी की कि अच्छा हुआ सर्प निकल गया। हेमाडपंत असहमत हुए — उनका मत था कि सर्पों को मारना चाहिए। दोनों बिना निष्कर्ष विवाद करते रहे। अगले दिन यह प्रश्न बाबा के समक्ष रखा गया:
"God lives in all beings and creatures, whether they be serpents or scorpions. He is the Great Wire-puller of the world, and all beings — serpents, scorpions etc. — obey His command. Unless He will it, nobody can do any harm to others. The world is all dependent on Him, and no one is independent. So we should take pity and love all creatures, leave off adventurous fights and killings, and be patient. The Lord (God) is the Protector of all."
(हिन्दी अर्थ: "ईश्वर सब प्राणियों और जीवों में निवास करते हैं — सर्प हों अथवा बिच्छू। वे संसार के महान सूत्रधार हैं, और सब प्राणी — सर्प, बिच्छू आदि — उन्हीं की आज्ञा का पालन करते हैं। जब तक वे न चाहें, कोई किसी का कुछ नहीं बिगाड़ सकता। सम्पूर्ण संसार उन्हीं पर आश्रित है, कोई स्वतन्त्र नहीं है। अतः हमें सब प्राणियों पर दया और प्रेम रखना चाहिए — साहसिक संघर्ष और हत्या को त्याग देना चाहिए, और धैर्य रखना चाहिए। प्रभु ही सब के रक्षक हैं।")
इस अध्याय में दर्ज साईं बाबा के शब्दशः वचन
- (मिरीकर से) "Do you know our Dwarakamayi? This Masjidmayi is very merciful — she is the mother of the simple devotees, whom she will save in calamities. Once a person sits on her lap, all his troubles are over."
(हिन्दी अर्थ: "क्या तुम हमारी द्वारकामाई को जानते हो? यह मस्जिदमाई अत्यन्त दयालु है — सरल भक्तों की माता, संकट में रक्षक। उसकी गोद में बैठते ही सब कष्ट समाप्त हो जाते हैं।")
- (मिरीकर से, सर्प के विषय में) "Do you know the 'Lamba Bawa'? He is so terrible. But what can he do to the children of Dwarakamayi?"
(हिन्दी अर्थ: "क्या तुम 'लम्बा बावा' को जानते हो? वह कितना भयावह है। परन्तु वह द्वारकामाई के बच्चों का क्या कर सकता है?")
- (जब मिरीकर ने शामा का साथ अस्वीकार किया) "Alright, do not go. We should mean well and do well. Whatever is destined to happen, will happen."
(हिन्दी अर्थ: "ठीक है, मत जाओ। हमें भली बात सोचनी और भला कर्म करना चाहिए। जो होना है वह तो होगा ही।")
- (बूटी से) "What does this Nana say? He foretells death for you. Well, you need not be afraid. Tell him boldly, 'Let us see how death kills.'"
(हिन्दी अर्थ: "यह नाना क्या कह रहा है? तुम्हारी मृत्यु की भविष्यवाणी कर रहा है। तुम्हें डरने की आवश्यकता नहीं। उससे साहस से कहो — 'देखें, मृत्यु कैसे मारती है।'")
- (मध्य-रात्रि, अमीर के तकिये पर सर्प मिलने से पूर्व) "Oh Abdul, some devilish creature is dashing against the side of My bed."
(हिन्दी अर्थ: "अरे अब्दुल, कोई दुष्ट प्राणी मेरी शय्या के किनारे टकरा रहा है।")
- (सर्प-बिच्छू पर निश्चायक मत) "God lives in all beings and creatures, whether they be serpents or scorpions. He is the Great Wire-puller of the world. Unless He will it, nobody can do any harm to others. So we should take pity and love all creatures, leave off adventurous fights and killings, and be patient. The Lord is the Protector of all."
(हिन्दी अर्थ: "ईश्वर सब प्राणियों में निवास करते हैं — सर्प हों या बिच्छू। वे संसार के महान सूत्रधार हैं। उनकी इच्छा के बिना कोई किसी का कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अतः सब प्राणियों पर दया और प्रेम रखो — साहसिक संघर्ष और हत्या त्यागो, धैर्य रखो। प्रभु ही सब के रक्षक हैं।")
मूल अध्याय: saibaba.org · अंग्रेज़ी संस्करण: English version
यह पृष्ठ हेमाडपंत की मूल कथा का स्रोत-सम्मत हिन्दी रूपान्तरण है — कोई कथन बाबा के शब्दों के रूप में नहीं जोड़ा गया है। हर बाबा-वचन के साथ मूल अंग्रेज़ी पाठ भी संलग्न है।