अध्याय 11 — साईं सगुण-ब्रह्म रूप में; डॉ. पण्डित की पूजा; हाजी सिद्दीक फाल्के; तत्त्वों पर अधिकार
स्रोत: श्री साईं सच्चरित्र, अनुवादक: न. वि. गुणाजी
मराठी मूल: सच्चरित (archive.org स्कैन) · भक्त-बयान: नरसिंह स्वामी 1936 (Internet Archive) · पूर्ण ग्रन्थ-सूची: /hi/sources.html
मूल पाठ: https://www.saibaba.org/satcharitra/sai11.html
अनुभाग
डॉ. पण्डित और त्रिपुण्ड्र
तात्यासाहेब नूलकर के मित्र डॉ. पण्डित शिरडी आये। बाबा ने उन्हें दादाभट केलकर के पास भेज दिया। दादाभट ने बाबा की पूजा प्रारम्भ की, और डॉ. पण्डित ने उनकी पूजा-थाली ली, चन्दन-लेप उठाया, और बाबा के मस्तक पर त्रिपुण्ड्र (तीन क्षैतिज रेखाएँ) लगा दिया। सबको आश्चर्य हुआ कि बाबा मौन रहे। अब तक केवल म्हाळसापति को ही बाबा के कण्ठ तक चन्दन लगाने की अनुमति थी — मस्तक तक नहीं।
जब दादाभट ने बाबा से पूछा कि यह अनुमति केवल डॉ. पण्डित को क्यों, बाबा ने उत्तर दिया कि पण्डित ने बाबा को अपने ही गुरु — धोपेश्वर के रघुनाथ महाराज (काका पुराणिक) — के समान माना, और लेप ठीक वैसे ही लगाया जैसे वे अपने गुरु को लगाते थे।
बाबा का भक्तों से वचन
"If mothers kicked their children and if the sea turned back the rivers, He would neglect the devotees' welfare; He, the slave of His devotees, always stood by them, and responded to them whenever they called upon Him, and that He always longed for their love."
(हिन्दी अर्थ: "यदि माताएँ अपने बच्चों को लात मारें, और यदि समुद्र नदियों को लौटा दे — तब भी वे भक्तों के कल्याण की उपेक्षा नहीं करेंगे; अपने भक्तों के दास होने के नाते वे सदा उनके साथ खड़े रहते थे, जब-जब उन्हें पुकारा जाता उत्तर देते थे, और उनके प्रेम के लिए सदा लालायित रहते थे।")
हाजी सिद्दीक फाल्के
कल्याण के मुसलमान सज्जन सिद्दीक फाल्के, मक्का-मदीना की तीर्थयात्रा के पश्चात शिरडी आये। वे उत्तराभिमुख चावड़ी में निवास करते और मस्जिद के खुले आँगन में बैठते। नौ मास तक बाबा ने उनकी पूर्ण उपेक्षा की और उन्हें मस्जिद में पाँव रखने नहीं दिया। उन्हें परामर्श मिला कि शामा (माधवराव देशपांडे) के माध्यम से बाबा से सम्पर्क करें।
शामा ने मध्यस्थता की। बाबा का उत्तर:
"Shama, you are too young to understand things. If the Fakir (Allah) does not allow, what can I do? Without His grace, who will climb into the masjid? Well, go to him and ask him whether he will come to the narrow footpath near the Barvi well."
(हिन्दी अर्थ: "शामा, इन बातों को समझने के लिए तू अभी छोटा है। यदि फ़कीर (अल्लाह) अनुमति न दे, मैं क्या कर सकता हूँ? उनकी कृपा के बिना कौन मस्जिद में चढ़ सकता है? जा, उनसे पूछ कि क्या वे बारवी के कुएँ के निकट की संकरी पगडंडी पर आयेंगे?")
शामा सम्मति लेकर लौटे। बाबा ने पूछा: "क्या वे मुझे चार किश्तों में चालीस हज़ार रुपये देंगे?" शामा हाजी का उत्तर लेकर लौटे कि वे चालीस लाख भी देने को तैयार हैं। बाबा ने पूछा: "हम मस्जिद में एक बकरी कुर्बान करने जा रहे हैं — पूछ, उन्हें माँस चाहिए, रान, अथवा अण्डकोश?" शामा हाजी का उत्तर लाये: वे बाबा की कोलम्बा (मिट्टी का बर्तन) से एक छोटा टुकड़ा पाकर ही प्रसन्न होंगे।
यह सुनते ही बाबा उत्तेजित हुए, मिट्टी के पात्र और कोलम्बा फेंक दिये, हाजी की ओर बढ़े, अपनी कफनी उठायी, और बोले:
"Why do you brag and fancy yourself great and pose yourself as an old Haji? Do you read Koran like this? You are proud of your pilgrimage to Mecca, but you do not know Me."
(हिन्दी अर्थ: "क्यों इतराते हो और स्वयं को महान मानकर एक पुराने हाजी के रूप में दिखाते हो? क्या क़ुरान इसी प्रकार पढ़ी जाती है? तुम्हें अपनी मक्का-यात्रा का अभिमान है, परन्तु मुझे नहीं जानते।")
तदुपरान्त बाबा ने उनके लिए आमों की टोकरियाँ ख़रीदीं, और अपनी जेब से 55 रुपये लेकर लौटे। उस दिन से हाजी का मस्जिद में स्वागत हुआ; बाबा उन्हें भोजन के लिए बुलाते और समय-समय पर रुपये देते रहे।
तत्त्वों पर अधिकार
तूफ़ान। एक सायं शिरडी पर एक भयानक तूफ़ान आया — काले बादल, तीव्र वायु, मूसलाधार वर्षा, सम्पूर्ण ग्राम जल-मग्न। पक्षी, पशु और मनुष्य — सब मस्जिद की ओर भागे। बाबा बाहर आये, मस्जिद के किनारे खड़े हुए, और गर्जना भरी वाणी से तूफ़ान को सम्बोधित किया:
"Stop, stop your fury and be calm."
(हिन्दी अर्थ: "रुको, अपना प्रकोप रोको, शान्त हो जाओ।")
कुछ ही क्षणों में वर्षा थमी, वायु रुक गयी, और चाँद निकल आया।
धूनी। एक अन्य अवसर पर धूनी की अग्नि इतनी ऊँचाई तक उठ गयी कि लपटें ऊपर की कड़ियों तक पहुँच गयीं। किसी का बाबा से कुछ कहने का साहस न हुआ। बाबा ने अपना सट्का (छोटी छड़ी) उठाया, सामने के स्तम्भ पर प्रहार किया, और बोले:
"Get down. Be calm."
(हिन्दी अर्थ: "नीचे आओ। शान्त हो जाओ।")
प्रत्येक प्रहार के साथ लपटें नीची होती गयीं, और कुछ ही मिनटों में धूनी पूर्ववत् हो गयी।
इस अध्याय में दर्ज साईं बाबा के शब्दशः वचन
- (दादाभट से, डॉ. पण्डित के त्रिपुण्ड्र पर) "He believed Me to be the same as his Guru, Raghunath Maharaj of Dhopeshwar… he applied the paste to My forehead, as he was doing to his Guru."
(हिन्दी अर्थ: "उसने मुझे अपने ही गुरु, धोपेश्वर के रघुनाथ महाराज, के समान माना… और लेप मेरे मस्तक पर वैसे ही लगाया जैसे वह अपने गुरु को लगाता था।")
- (वचन) "If mothers kicked their children and if the sea turned back the rivers, He would neglect the devotees' welfare…"
(हिन्दी अर्थ: "यदि माताएँ अपने बच्चों को लात मारें, और यदि समुद्र नदियों को लौटा दे — तब भी वे भक्तों के कल्याण की उपेक्षा नहीं करेंगे…")
- (शामा से, सिद्दीक फाल्के के विषय में) "Shama, you are too young to understand things. If the Fakir (Allah) does not allow, what can I do? Without His grace, who will climb into the masjid?"
(हिन्दी अर्थ: "शामा, इन बातों को समझने के लिए तू अभी छोटा है। यदि फ़कीर (अल्लाह) अनुमति न दे, मैं क्या कर सकता हूँ? उनकी कृपा के बिना कौन मस्जिद में चढ़ सकता है?")
- (सीधे सिद्दीक फाल्के से) "Why do you brag and fancy yourself great and pose yourself as an old Haji? Do you read Koran like this? You are proud of your pilgrimage to Mecca, but you do not know Me."
(हिन्दी अर्थ: "क्यों इतराते हो और स्वयं को महान मानकर एक पुराने हाजी के रूप में दिखाते हो? क्या क़ुरान इसी प्रकार पढ़ी जाती है? तुम्हें अपनी मक्का-यात्रा का अभिमान है, परन्तु मुझे नहीं जानते।")
- (तूफ़ान से) "Stop, stop your fury and be calm."
(हिन्दी अर्थ: "रुको, अपना प्रकोप रोको, शान्त हो जाओ।")
- (धूनी से) "Get down. Be calm."
(हिन्दी अर्थ: "नीचे आओ। शान्त हो जाओ।")
मूल अध्याय: saibaba.org · अंग्रेज़ी संस्करण: English version
यह पृष्ठ हेमाडपंत की मूल कथा का स्रोत-सम्मत हिन्दी रूपान्तरण है — कोई कथन बाबा के शब्दों के रूप में नहीं जोड़ा गया है। हर बाबा-वचन के साथ मूल अंग्रेज़ी पाठ भी संलग्न है।