अध्याय 29 — मद्रासी भजनी मेला; तेन्डुलकर परिवार; कैप्टन हाटे; वामन नारवेकर
स्रोत: श्री साईं सच्चरित्र, अनुवादक: न. वि. गुणाजी
मराठी मूल: सच्चरित (archive.org स्कैन) · भक्त-बयान: नरसिंह स्वामी 1936 (Internet Archive) · पूर्ण ग्रन्थ-सूची: /hi/sources.html
मूल पाठ: https://www.saibaba.org/satcharitra/sai29.html
अनुभाग
मद्रासी भजनी मेला
1916 में चार-सदस्यीय मद्रासी भजनी मेला (रामदासी पंथ) — पुरुष, पत्नी, पुत्री, और साली (नाम सुरक्षित नहीं) — बनारस की तीर्थ-यात्रा पर थे, जब उन्होंने बाबा द्वारा प्रति-दिन दक्षिणा-राशि वितरण की चर्चा सुनी। (उस समय बाबा भक्त कोंडाजी की तीन-वर्षीय पुत्री अमानी को प्रति-दिन 1 रुपया दे रहे थे; अमानी की माँ जमाली को 6 रुपये; विविध भक्तों को 2-5 रुपये; और अन्यों को 10-50 रुपये जैसा प्रसन्न होते।) दल भीतर-भीतर धन की आशा से शिरडी आया।
उनमें से तीन लोभ से भरे थे। मुख्य महिला भिन्न थीं: एक मध्याह्न-आरती में बाबा उनकी श्रद्धा से प्रसन्न हुए और उन्हें उनके इष्टम् का दर्शन कराया — उन्होंने आसन पर साईं बाबा को नहीं, अपितु सीतानाथ (राम) को देखा। नेत्रों से अश्रु बहे; आनन्द से ताली बजायी। अन्यों को केवल साईंनाथ ही दिखे। उन्होंने पति को बताया; उन्होंने इसे भ्रम कहकर त्याग दिया।
पति का स्वप्न-दर्शन
एक रात्रि पति को एक लम्बा स्वप्न-दर्शन हुआ: वे एक बड़े नगर में थे; पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार किया, हाथ बाँधे, पिंजरे में डाल दिया। बाबा शान्त-भाव से बाहर खड़े थे।
उन्होंने प्रार्थना की: "आपका यश सुनकर मैं आपके चरणों में आया था — आपकी प्रत्यक्ष उपस्थिति में मुझ पर यह विपत्ति क्यों आये?" इसके पश्चात का संवाद बाबा की कर्म-शिक्षा को दर्ज करता है:
"तुम्हें अपने कर्मों के परिणाम भोगने ही होंगे।" — "मैंने इस जन्म में ऐसा कुछ नहीं किया जो ऐसी विपत्ति लाये।" — "इस जन्म में न सही, पूर्व-जन्म में कोई पाप किया होगा।" — "क्या आपकी उपस्थिति में वह सूखे घास की भाँति अग्नि के सामने जलकर नष्ट नहीं हो सकता?" — "क्या तुम्हें इतनी श्रद्धा है?" — "हाँ।"
बाबा ने उनसे आँखें मूँदने को कहा। उन्हें एक धमक सुनायी दी — आँखें खोलीं तो पुलिस गिरी हुई, रक्त-स्नात, और वे स्वयं मुक्त। बाबा: "अब तो तुम और भी फँस गये; अधिकारी आयेंगे और तुम्हें गिरफ़्तार करेंगे।" उन्होंने प्रार्थना की। बाबा ने पुनः आँखें बन्द करने को कहा; खोलीं तो वे पिंजरे के बाहर थे, बाबा निकट।
वे बाबा के चरणों में गिर पड़े। बाबा ने पूछा: "इस नमस्कार और पहले के नमस्कारों में कोई भेद है?" उन्होंने उत्तर दिया: "बहुत बड़ा। पहले के नमस्कार आपसे धन लेने के लक्ष्य से थे; यह अब ईश्वर रूप में आपको है। पहले मुझे यह आपत्ति थी कि आप मुसलमान होते हुए हम हिन्दुओं को बिगाड़ रहे हैं।"
बाबा ने तब असंगति प्रकट की: "क्या तुम अपने घर मोहर्रम पर एक पंजा (हाथ-प्रतीक) और विवाहों में कदबीबी नामक मुसलमानी देवी की पूजा नहीं करते?" व्यक्ति ने दोनों स्वीकार किए। बाबा: "तब और क्या चाहिए?"
उनके मन में अपने गुरु रामदास के दर्शन की इच्छा उठी। बाबा: "पीछे मुड़कर देखो।" रामदास वहीं थे; वे चरणों में गिरने ही वाले थे कि रामदास लुप्त हो गये।
उन्होंने बाबा की आयु पूछी। बाबा: "क्या तुम कहते हो मैं वृद्ध हूँ! ज़रा मेरे साथ दौड़ लगाओ।" बाबा दौड़े; वे पीछे; बाबा अपने ही पदचिह्नों की धूल में अदृश्य हो गये। व्यक्ति जाग गये।
उनकी मनोवृत्ति पूर्णतः बदल गयी। लोलुप-संशयी प्रवृत्ति लुप्त हो गयी। अगले प्रातः बाबा ने उन्हें 2 रुपयों की मिठाई प्रसाद रूप में और अपनी जेब से 2 रुपये देकर आशीर्वाद दिया: "अल्लाह तुम्हें प्रचुरता देंगे, और तुम्हारा कल्याण करेंगे।" दल प्रचुर धन और सफल तीर्थ-यात्रा के साथ घर लौटा।
बान्द्रा के तेन्डुलकर परिवार — बाबू की परीक्षा
बान्द्रा (बम्बई का उपनगर) का तेन्डुलकर परिवार समस्त भक्त था। श्रीमती सावित्रीबाई तेन्डुलकर ने बाबा की लीलाओं पर 800 अभंगों और पदों की एक मराठी पुस्तक "श्री साईंनाथ भजन माला" प्रकाशित की।
पुत्र बाबू तेन्डुलकर चिकित्सा-परीक्षा के लिए कठोर अध्ययन कर रहे थे। ज्योतिषियों ने कुण्डली देखकर कहा कि उस वर्ष ग्रह अनुकूल नहीं — एक वर्ष प्रतीक्षा करें। वे अशान्त और निराश हो उठे। माता शिरडी गयीं और बाबा से उल्लेख किया:
"अपने पुत्र से कहो कि मुझ पर विश्वास रखे, ज्योतिषियों और हस्त-रेखा-शास्त्रियों की कुण्डलियों और भविष्यवाणियों को छोड़कर अपना अध्ययन जारी रखे। शान्त चित्त से परीक्षा में बैठे, वह इस वर्ष अवश्य उत्तीर्ण होगा। उससे कहो मुझ पर भरोसा रखे और निराश न हो।"
बाबू ने लिखित परीक्षा अच्छी दी, परन्तु अपने अंकों पर सन्देह करके मौखिक के लिए नहीं गये। परीक्षक, जो जानते थे कि वे लिखित में उत्तीर्ण हैं, ने एक सहपाठी को उन्हें बुलाने भेजा। बाबू मौखिक में बैठे और दोनों उत्तीर्ण कर लिए। सच्चरित्र की व्याख्या: "सन्देह और कठिनाइयाँ हमारी श्रद्धा को दृढ़ करने के लिए ही आती हैं; पूर्ण श्रद्धा से बाबा को थामे रहो।"
तेन्डुलकर परिवार — रघुनाथराव की पेन्शन
बाबू के पिता रघुनाथराव बम्बई की एक विदेशी व्यापारिक कम्पनी में सेवा में थे। वृद्धावस्था ने अवकाश लेने को बाध्य किया; कम्पनी ने पेन्शन पर सेवानिवृत्त करने का निर्णय किया। उनका वेतन 150 रुपये मासिक था; आधी राशि (75 रुपये) परिवार के लिए अपर्याप्त होगी।
अन्तिम निर्णय से पन्द्रह दिन पूर्व बाबा श्रीमती तेन्डुलकर को स्वप्न में दर्शन दे गये:
"I wish that Rs. 100/- should be paid (settled) as pension, will this satisfy you?"
(हिन्दी अर्थ: "मेरी इच्छा है कि 100 रुपये पेन्शन के रूप में दिए जायें — क्या यह तुम्हें संतुष्ट करेगा?")
— "बाबा, मुझसे क्यों पूछ रहे हैं? हम पूर्णतः आप पर विश्वास करते हैं।"
कम्पनी ने वस्तुतः 110 रुपये दिए — बाबा के वचन से 10 रुपये अधिक — "एक विशेष प्रकरण के रूप में।"
बीकानेर के कैप्टन हाटे — वालपापडी
बीकानेर में नियुक्त कैप्टन हाटे एक श्रेष्ठ भक्त थे। बाबा उन्हें स्वप्न में दिखे: "क्या तुम मुझे भूल गये?" हाटे ने बाबा के पैर पकड़ लिए: "यदि शिशु अपनी माता को भूल जाये, तो उसका कल्याण कैसे हो?" उन्होंने उद्यान से ताज़ी वालपापडी सब्जी ली, शीधा (घी, गेहूँ का आटा, दाल) तैयार किया, और दक्षिणा सहित अर्पण ही करने वाले थे — कि जाग गये।
उन्होंने सब कुछ शिरडी भेजने का निर्णय किया। ग्वालियर आने पर उन्होंने एक मित्र को 12 रुपये मनी-ऑर्डर भेजे, और निर्देश दिया: 2 रुपये शीधा और वालपापडी सब्जी के लिए; 10 रुपये दक्षिणा। मित्र शिरडी पहुँचे; शीधा ख़रीदा गया; वालपापडी न मिली। तभी एक स्त्री सिर पर टोकरी लिए आ पहुँची — जिसमें वालपापडी थी। उसे ख़रीदा और अर्पित किया गया।
श्री निमोणकर ने अगले दिन नैवेद्य तैयार किया। भोजन के समय बाबा ने केवल वालपापडी ही खायी — चावल अथवा अन्य कोई वस्तु नहीं। बताये जाने पर कैप्टन हाटे प्रफुल्लित हुए।
कैप्टन हाटे — अभिमन्त्रित रुपया
हाटे ने आगे चलकर घर में एक ऐसा रुपया रखने की इच्छा प्रकट की जो बाबा के स्पर्श से अभिमन्त्रित हो। शिरडी जाने वाले एक मित्र को एक रुपया दिया गया। मस्जिद में मित्र ने पहले अपनी दक्षिणा अर्पित की (बाबा ने जेब में रख ली), तदुपरान्त हाटे का रुपया। बाबा ने उसे लिया, ध्यान से देखा, अपने दायें अंगूठे से उछाला, उससे खेले, और बोले:
"Return this to its owner with the Prasad of Udi, tell him that I want nothing from him, ask him to live in peace and contentment."
(हिन्दी अर्थ: "इसे उदी-प्रसाद सहित स्वामी को लौटा दो; उससे कहो कि मुझे उससे कुछ नहीं चाहिए — वह शान्ति और संतोष से रहे।")
हाटे ने अभिमन्त्रित रुपया ग्वालियर में हर्ष से प्राप्त किया। अध्याय की टिप्पणी: बाबा सदा शुभ विचारों को प्रोत्साहित करते थे, और भक्त की इच्छानुसार उन्हें पूर्ण करते थे।
वामन नारवेकर — राम-मारुति रुपया
वामन नारवेकर बाबा से अत्यन्त प्रेम करते थे। वे एक रुपया लाये जिसके एक ओर राम, लक्ष्मण और सीता और दूसरी ओर हाथ जोड़े हुए मारुति अंकित थे। उन्होंने इसे अभिमन्त्रण और उदी-सहित लौटाने की आशा से अर्पित किया। बाबा ने तुरन्त उसे जेब में रख लिया।
शामा ने वामनराव की ओर से मध्यस्थता की। बाबा ने वामनराव की उपस्थिति में उत्तर दिया:
"Why should it be returned to him? We should keep it ourselves. If he gives Rs. 25/- for it, it will be returned."
(हिन्दी अर्थ: "उसे क्यों लौटायें? हम स्वयं इसे रखें। यदि वह इसके बदले 25 रुपये दे, तो लौटा देंगे।")
वामनराव ने 25 रुपये एकत्र कर बाबा के सामने रखे। बाबा ने तब कहा:
"The value of that rupee far exceeds 25 Rupees. Shama, take this rupee, let us have it in our store, keep this in your shrine and worship it."
(हिन्दी अर्थ: "उस रुपये का मूल्य 25 रुपयों से कहीं अधिक है। शामा, यह रुपया लो, हमारे संग्रह में रहे, इसे अपने देव-स्थान में रखकर पूजा करो।")
हेमाडपंत की टिप्पणी: किसी का यह पूछने का साहस न हुआ क्यों। केवल बाबा ही जानते थे कि प्रत्येक के लिए क्या उत्तम है। हाटे का रुपया लौटाया गया; नारवेकर का रखा गया।
इस अध्याय में दर्ज साईं बाबा के शब्दशः वचन
- (पति के स्वप्न में, कर्म पर) "You must suffer the consequences of your action… If not in this life, you must have committed some sin in your past life."
(हिन्दी अर्थ: "तुम्हें अपने कर्मों के परिणाम भोगने ही होंगे… इस जन्म में न सही, पूर्व-जन्म में कोई पाप अवश्य किया होगा।")
- (स्वप्न में, श्रद्धा पर) "Have you got such faith?" — फिर "Close your eyes."
(हिन्दी अर्थ: "क्या तुम्हें इतनी श्रद्धा है?" — फिर "आँखें बन्द करो।")
- (असंगति प्रकट करते हुए) "Do you not worship a Panja in your house at Moharum, and a Mahomedan deity by name Kadbibi at marriages?"
(हिन्दी अर्थ: "क्या तुम अपने घर मोहर्रम पर एक पंजा और विवाहों में कदबीबी नामक मुसलमानी देवी की पूजा नहीं करते?")
- (दौड़-लोप पर) "Do you say I am old? Just run a race with Me and see."
(हिन्दी अर्थ: "क्या तुम कहते हो मैं वृद्ध हूँ? ज़रा मेरे साथ दौड़ लगाओ।")
- (विदाई-आशीर्वाद) "Allah will give you plenty and He will do you all good."
(हिन्दी अर्थ: "अल्लाह तुम्हें प्रचुरता देंगे और तुम्हारा कल्याण करेंगे।")
- (श्रीमती तेन्डुलकर से, बाबू की परीक्षा पर) "Tell your son to believe in Me, to throw aside horoscopes and predictions of astrologers and palmists and go on with his studies. Let him appear for the examination with a calm mind, he is sure to pass this year. Ask him to trust in Me and not to get disappointed."
(हिन्दी अर्थ: "अपने पुत्र से कहो कि मुझ पर विश्वास रखे, ज्योतिषियों और हस्त-रेखा-शास्त्रियों की भविष्यवाणियाँ छोड़कर अपना अध्ययन जारी रखे। शान्त चित्त से परीक्षा में बैठे — वह इस वर्ष अवश्य उत्तीर्ण होगा।")
- (श्रीमती तेन्डुलकर से, रघुनाथराव की पेन्शन पर) "I wish that Rs. 100/- should be paid as pension, will this satisfy you?"
(हिन्दी अर्थ: "मेरी इच्छा है कि 100 रुपये पेन्शन के रूप में दिए जायें — क्या यह तुम्हें संतुष्ट करेगा?")
- (कैप्टन हाटे के मित्र से, अभिमन्त्रित रुपये पर) "Return this to its owner with the Prasad of Udi, tell him that I want nothing from him, ask him to live in peace and contentment."
(हिन्दी अर्थ: "इसे उदी-प्रसाद सहित स्वामी को लौटा दो; उससे कहो कि मुझे उससे कुछ नहीं चाहिए — वह शान्ति और संतोष से रहे।")
- (शामा से, नारवेकर के रुपये पर) "Why should it be returned to him? We should keep it ourselves. If he gives Rs. 25/- for it, it will be returned."
(हिन्दी अर्थ: "उसे क्यों लौटायें? हम स्वयं इसे रखें। यदि वह इसके बदले 25 रुपये दे, तो लौटा देंगे।")
- (वही, 25 रुपये देने के पश्चात) "The value of that rupee far exceeds 25 Rupees. Shama, take this rupee, let us have it in our store, keep this in your shrine and worship it."
(हिन्दी अर्थ: "उस रुपये का मूल्य 25 रुपयों से कहीं अधिक है। शामा, यह रुपया लो, हमारे संग्रह में रहे, अपने देव-स्थान में रखकर पूजा करो।")
मूल अध्याय: saibaba.org · अंग्रेज़ी संस्करण: English version
यह पृष्ठ हेमाडपंत की मूल कथा का स्रोत-सम्मत हिन्दी रूपान्तरण है — कोई कथन बाबा के शब्दों के रूप में नहीं जोड़ा गया है। हर बाबा-वचन के साथ मूल अंग्रेज़ी पाठ भी संलग्न है।