Sit With Sai
भाग 2 · पृष्ठ 149

दामोदर सावलराम रसने (दामू अन्ना)

अहमदनगर (बाद में पुणे) के धनी कासार; वार्षिक रामनवमी ध्वज के दाता

संदर्भ

दामू अन्ना का स्वयं का 1936 बयान नरसिंह स्वामी संग्रह में सर्वाधिक उद्धृत है। वे अध्याय 25 के मुख्य पात्र हैं। पूर्ण सच्चरित्र-अभिलेख में: (1) कपास-सट्टा जो बाबा ने शामा के माध्यम से रोका ('शेठ पागल हो गया है… आधी रोटी से संतोष करे'); (2) अनाज-व्यापार जो बाबा ने रोका ('पाँच सेर रुपये में ख़रीदोगे, सात सेर में बेचोगे'); (3) चार-आम आम्र-लीला — गोवा से 300-आम पार्सल में से चार बाबा ने कोलम्बा में रखकर छोटी पत्नी को दिए, चार पुत्र-चार पुत्री के वचन के साथ — पूर्ण हुआ।

दामू अन्ना के दो मौन-प्रश्नों के उत्तर भी सच्चरित्र संरक्षित करता है:

मंजरी से लदे आम के वृक्ष को देखो। यदि सब मंजरियाँ फल बन जातीं, कितनी सम्पन्न फसल होती। परन्तु क्या ऐसा होता है? अधिकांश पवन आदि से झड़ जाती हैं। बहुत कम शेष रहती हैं।
जब-जब और जहाँ-जहाँ तुम मेरा स्मरण करोगे, मैं तुम्हारे साथ रहूँगा।

दामू अन्ना की 1936 की टिप्पणी: 'यह वचन 1918 से पहले निभाया गया, और 1918 के बाद भी निभाया जा रहा है।'

1936 के बयान के विषय में

दामू अन्ना का पूर्ण 1936 बयान (पृष्ठ 149) अध्याय 25 की सामग्री को आगे बढ़ाता है: पत्नी की आभूषण-पेटी (सौभाग्य-नथ सहित) तीस-वर्ष पुराने एक मित्र द्वारा चुरायी जाना — दामू अन्ना के बाबा-चित्र के सम्मुख रोने के अगले दिन वापस; बहन की मृत्यु के पश्चात बाबा का पूरण-पोली भोज से ढाँढ़स।

नरसिंह स्वामी से शब्दशः उद्धरण (1940 का दशक)

confusion and struggle for this? The pot is mine and I am the pot’s.” Baba once spoke thus: “My mother was greatly rejoicing that she had got a son (i.e., me). I was for my part wondering at her conduct. When did she beget me? Was I begotten at all? Have I not been already in existence? Why is she rejoicing over this?” Once at Shirdi, somebody had prepared “Sira (i.e.., sweetened semolina pudding). Baba asked me if I had been given ‘Sira”. I then said that I was not on good terms with B.a and that I had not been given ‘Sira’. Baba then gave me 135 instructions. “Who gives what to whom? What is this ‘Sira’? Who eats it? Do not say of anyone that he is inimical. Who is whose enemy? Do not entertain any ill feelings towards anyone. All are one and the same.” That idea is brought out at the end of Ch.II of my commentary on Amritanubhava. A religious person of Satara once offered to teach me Vedanta but I said that I could rely on Sai Baba’s help in taht mater. Then that person jeered at Baba and said taht as a Moslem he knew nothing and could teach nothing of Vedanta.

स्रोत: बी. वी. नरसिंह स्वामी, Devotees' Experiences of Sri Sai Baba (आल इंडिया साईं समाज, मद्रास, 1940 का दशक; पुनर्मुद्रण अखंड साईंनाम सप्ताह समिति, हैदराबाद)। इण्टरनेट आर्काइव पर PDF · पूर्ण OCR पाठ। खोज-शब्द: Damodar Rasane। यह अंग्रेज़ी मूल का प्रामाणिक उद्धरण है; पूर्ण-संदर्भ के लिए कृपया मूल PDF देखें।

सम्बन्धित अध्याय

अध्याय 06अध्याय 25
स्रोत: बी. वी. नरसिंह स्वामी, Devotees' Experiences of Sri Sai Baba, 1940 के दशक, श्री साईं बाबा संस्थान, शिरडी।
1936 में लिए गये हस्ताक्षरित बयानों पर आधारित।
अंग्रेज़ी संस्करण: English source page
सम्पादक: सिट विद् साईं सम्पादकीय · सम्पादकीय सिद्धान्त ·