कालक्रम — 1838 → 1918 → 1944
साईं बाबा के जीवन की प्रलेखित प्रमुख तिथियाँ और घटनाएँ — सच्चरित्र, *साईं लीला* पत्रिका, और नरसिंह स्वामी के बयानों से।
| लगभग 1838 | बाबा का जन्म (अनुमानित — हेमाडपंत अध्याय 10 में 1918 की महासमाधि और 60-वर्ष निरन्तर-निवास से उलटी गणना से) |
| लगभग 1854 | बाबा का शिरडी में प्रथम आगमन — नीम वृक्ष के नीचे एक 16-वर्षीय तरुण रूप में (अध्याय 4) |
| लगभग 1857 | बाबा शिरडी से अदृश्य; अगले कुछ वर्ष निज़ाम-राज्य में |
| लगभग 1858 | बाबा का चाँद पाटिल की बारात के साथ शिरडी में द्वितीय आगमन; म्हाळसापति का 'या साईं' अभिवादन (अध्याय 5) |
| 1886 | मार्गशीर्ष-पूर्णिमा — बाबा की 72-घंटे की समाधि; म्हाळसापति ने तीन दिन शरीर रक्षित रखा (अध्याय 43-44) |
| 1897 | गोपालराव गुंड के प्रस्ताव पर पहला उरुस — बाबा ने रामनवमी की तिथि चुनी (अध्याय 6) |
| लगभग 1908-09 | नानासाहेब चांदोरकर के माध्यम से बाबा का यश बम्बई-प्रेजिडेन्सी तक फैलना |
| 10 दिसम्बर 1909 | दीक्षित वाडे की नींव; उसी रात्रि चावड़ी की आरती-प्रथा का आरम्भ (अध्याय 4, 37) |
| 1910 | हण्डी-प्रथा का अन्त — भक्तों के नैवेद्य से रसोई की आवश्यकता समाप्त (अध्याय 38) |
| दीवाली 1910 | अग्नि में हाथ — दूरस्थ लोहार-बालक की रक्षा (अध्याय 7) |
| रामनवमी 1911 | दीक्षित वाडे का प्रवेश |
| 1912 | मेघा की मृत्यु; काकासाहेब दीक्षित और बूटी को बूटी वाडे का स्वप्न; पादुकाओं की स्थापना (अध्याय 5, 28) |
| 1913 | बम्बई के बालाबुवा सुतार का 4-वर्ष पुराने चित्र-प्रणाम की बाबा-कृत पहचान (अध्याय 33) |
| 1914 | गीता 4.34 की व्याख्या नानासाहेब को; 2 अप्रैल — बी. वी. देव का ज्ञानेश्वरी स्वप्न-दर्शन (अध्याय 39, 41) |
| 1916 | हेमाडपंत की सेवा-निवृत्ति; गुरुपूर्णिमा पर पेन्शन-प्रसंग (अध्याय 3); दशहरा 1916 — बाबा का 'यह मेरा सीमोल्लंघन' वचन (अध्याय 42) |
| 1917 | हरि कानोबा का चप्पल-प्रसंग; अप्पासाहेब कुलकर्णी को 9 रुपये (अध्याय 49, 33) |
| 28 सितम्बर 1918 | बाबा को ज्वर का प्रथम आक्रमण (अध्याय 42) |
| 8 अक्टूबर 1918 | बाबा का व्याघ्र-प्रसंग — महासमाधि से सात दिन पूर्व (अध्याय 31) |
| 15 अक्टूबर 1918 | महासमाधि — मंगलवार, विजयादशमी (दशहरा), मध्याह्न लगभग 2:30 बजे; तात्या बच गये (अध्याय 42) |
| 16 अक्टूबर 1918 | बुधवार — बूटी वाडे के मुरलीधर-स्थल पर बाबा का अन्तिम संस्कार-निवास (अध्याय 43-44) |
| 1923 | *श्री साईं लीला* पत्रिका का आरम्भ — संस्थान की अधिकृत वार्षिकी |
| 1929 | हेमाडपंत द्वारा सच्चरित्र पूर्ण; हेमाडपंत का देहान्त |
| 1936 | बी. वी. नरसिंह स्वामी का 80 भक्तों से हस्ताक्षरित बयानों का संग्रह |
| 1944 | न. वि. गुणाजी द्वारा सच्चरित्र का अंग्रेज़ी अनुवाद — श्री साईं बाबा संस्थान, शिरडी |
तिथियाँ हेमाडपंत के सच्चरित्र (1929), *श्री साईं लीला* पत्रिका, बी. वी. देव के पत्रों, और बी. वी. नरसिंह स्वामी के 1936 के बयानों के अनुसार सत्यापित।